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मंगलवार, 27 जनवरी 2009

विनोद दुआ का पागलपन

आज (२७-०१-०९ ) के एनडी टीवी का विनोद दुआ लाइव कार्यक्रम देखकर येसा लगा की विनोद दुआ कोई जिम्मेदार पत्रकार न होकर एक कुंठित मानसिकता के रोगी हो गए है क्योकि पाकिस्तान की तुलना भारतीय संस्कृति से करना वह भी कुछ पागल लोगो के कृत्यों के आधार पर और उन सब को कटघरे में खडा करना जो जीवन पर्यंत इस राष्ट्र के कल्याण के लिए व्रत लिए हैं. येसा लगता है की आज की मिडिया अपने नशे में चूर किसी को कुछ भी कह सकती है , इन्हें जरा भी यह एहसास नहीं है की यह क्या कह रहे हैं और इसका क्या प्रभाव पडेगा. ये जिस संस्था(आर एस एस ) की तुलना पाकिस्तान से कर रहे हैं अगर उसके सामाजिक कार्यों को यह स्वस्थ मानसिकता से देखे तो इन्हें अपने आप पर शर्म आ जायेगी . यह जो कुछ पागलों का समूह श्रीराम सेना कर रही है उन सभी को दण्डित किया जाना चाहिए और येही बात आर एस एस ने भी कही है इसमे न जाने विनोद दुआ को कहा से गलती नजर आ रही है . मुझे तो लगता है की वह भी श्री राम सेना के ही समर्थन में बोल रहे है और उसको कही न कही बढ़ावा दे रहे हैं. अगर वह प्रस्तावित समाचार को तथा अपने डेस्क को छोड़ कर बाहर आवें व शुद्ध पत्रकारिता के सिद्धांत को अपनावें तो उन्हें इस घटना में सिर्फ उन पागलों का ही हाथ नजर आएगा न की अन्य का. रही बात पाकिस्तान व तालिबान से भारत की तुलना का तो सांस्कृतिक रूप से उनमे व हममे जमीं आसमान का अंतर है लेकीन यह बाते झूठी पत्रकारिता करके व पैसे की लालच में अपने पेशे को बेच करके नहीं समझी जा सकती. मै भगवान से प्रार्थना करता हूँ की विनोद दुआ और इन जैसे पत्रकारों को सदबुद्दी दे व अपने पेशे को ईमानदारी व पारदर्शिता से चलने की प्रेरणा दे.

21 टिप्‍पणियां:

Abhishek ने कहा…

RSS ke sanskritik karyon se sabhi vakif hain magar uske sambandh mein dushprachar ke liye use swayan mein pardarshita lani chahiye.

aarya ने कहा…
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aarya ने कहा…
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पवन कुमार अरविन्द (Pawan Kumar Arvind) ने कहा…

Mai Bhagwan se dua Karta hu ki Vinod Dua ki buddhi jald thik ho.
Pawan Kumar Arvind
New Delhi

पवन कुमार अरविन्द ने कहा…

Buddhihin Vinod Dua ko buddhi ke liye milkar dua kare.
P.K.Arvind

पवन कुमार अरविन्द ने कहा…
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mishra gorakhpuriya ने कहा…

aap ka blog pada acha laga . main bas itana kahana chahta hu ki jo log kisi baat ki tah tak jaye bina hi savam nirnay le lete hai vo tik nahi hota . shayad yahi kaam vinod dua ne kiya . unaki aur aap ke baat se to yahi lagata hai ki sthitee ADAH JAL GAARI CHALKAT JAY ki kalpana ko charitarth karti hai.
main un sabhi bhudajivi samajik logo ko ye salah dunga ki apane apane vicharo ko tool-mool kare .kayoki kabhi -kabhi kuch baaten sochane par majboor karti hai. annt main kahana chahuga ki 'DUSMANI KARO TO JAM K KARO PAR YE GUNJAIS RAHE KI JAB KABHI DOST BANE TO SHAMINDA N HONA PADE.'

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

पंगेबाज ने कहा…

अरे भैया जिस आदमी को मुंबई मे आतंकवादियो के उपर विजय पाने के बाद बाहर निकलते सैनिको की बंदेमातरम कहना सांप्रदायिक लगने लगा था आप उस बेवकूफ़ से और क्या आशा कर सकते है ?

रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

अत्यन्त सुंदर आलेख , भावनाओं की धरातल पर संवेदनात्मक उपस्थिति अच्छी लगी , बधाईयाँ !आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....

अनुनाद सिंह ने कहा…

समझते क्यों नहीं, आखिर 'पद्मश्री', 'पा्मभूषण' आदि इन्हे दुष्प्रचार के लिये ही दिये गये हैं।

संजय बेंगाणी ने कहा…

अरे! लोग आज भी दूआ को देखते भी हैं और गम्भीरता से भी लेते है?

aarya ने कहा…
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दिगम्बर नासवा ने कहा…

रत्नेश जी
आप की बात से सहमत हूँ मैं.............आज कल कुछ पत्रकार अपने आप को जज समझ बैठे है और अपने स्टूडियो में बैठे बैठे की को भी सही या ग़लत ठहरा देते हैं. दुआ जी भी उन्ही में से हैं.

शाश्‍वत शेखर ने कहा…

दुआ सर आजकल "ये है जायका इंडिया का" में ही अच्छे लगते हैं|

rajnish ने कहा…

Hi Ratnesh,
I have read your notes,I impress your words. According your word vinod dua compare RSS is similar to Pakistan. I think he have little bit knowledge about Pakistan and RSS.
This is only a task to take popularity by media. And his plan is success. Now today he is popular person only by media.

Thanks,
Rajnish
Programmer

दिनकर ने कहा…

विनोद दुआ कहां पागल है? वो तो समझदार है कि क्या क्या बकबास करने से उसे क्या क्या मिलेगा.

प्रणव राय की दुआ से विनोद दुआ की दुकानदारी सही चल रही है

Upadhyayjee ने कहा…

Dua ki ye durdasha dekh kar main man hi man unake liye sympathy de raha tha. Ek samay tha jab Dua aur Pranay Roy ek level ke patrakar samajhe jaate the. Aaj Dua sahab Pranay ke company me khana khane ke program anchor karte hain. Wo kabhi bhi achhe vaktaon ko dhang se uttar nahin de paaye hain apane karykram me. Just wo apna bakwas padh dete hain aur kisi par iljam laga dete hain. Javab dete kabhi nahin deta.

Chalo bhagvan se dua karo ki bechare thik ho jayen.

अनिल कान्त : ने कहा…

भैया ये भी एक तरह कि पॉलिटिक्स है ...न्यूज़ चैनल के क्षेत्र में

Anil Pusadkar ने कहा…

उन्हे खुद नही पता वे क्या कर रहे हैं।उन्हे माफ़ कर दिजीये।

narendra ने कहा…

Vinod dua ye kyon bhool jate hain ki Pakistan se vibhajan ke baad Delhi main jo basera mila wo bhi RSS ki wajah se hi mila. bahut krtaghan aadami hai.