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शनिवार, 9 मई 2009

हे माँ

आज मै तुम्हे याद करूँगा क्योंकि आज मदर डे है, आज मै तुमको तोहफे में कुछ दूंगा क्योकि आज मदर डे है, आज मै तुमसे समय निकाल कर मिलूँगा क्योंकि आज मदर डे है, साल में एक बार ही सही मै तुम्हारे बारे में सोचूंगा क्योंकि आज मदर डे है.
दैनिक जागरण जो भारत का अग्रणी समाचार पत्र है उसके दिल्ली संस्करण मे सम्माननीया शिल्पा शूद जी का एक लेख छपा है, मै उनकी विचारों को क्या कहूँ ये उनकी गलती नहीं है. उन्होंने लिखा है कि आपको मम्मी से कितना प्यार है? कितनी खास हैं माँ आप के लिए? मदर्स दे पर तोहफा देकर आप साबित कर सकते हैं कि माँ से बड़ा कोई नहीं,( कमाल है! अब बाजारू तोहफे माँ को माँ साबित करेंगे) उन्होंने आगे लिखा है आखिर माँ ही है जो बच्चों को खुश देखने कि खातिर सारे जतन करती है. ऐसे मे बच्चों का भी यह फर्ज बनता है कि इस तेज रफ्तार जिंदगी मे से एक दिन निकालकर उन्हें दें. शिल्पा जी ने शायद माँ को उन नेताओं कि सड़क पर लगी मूर्ति समझ लिया है जिनपर साल भर कबूतर व कौए गन्दा करते हैं और साल मे एक दिन कोई नेता उन्हें साफ करवाकर नयी माला पहनाता है और उन्हें याद करके अपना फर्ज निभाता है और फिर उसे उसके जीवन पर्यंत चलने वाले हाल पर छोड़ देता है.
क्या इतना उतावलापन किसी भारतीय के लिए माँ के प्रति साल में एक ही दिन रहता है, क्या हम माँ को साल में एक दिन याद रखने वाली मूर्ति समझते हैं कि उसे साफ किया और कुछ नये मालाओं से सजाकर फिर किसी ओट पर रख दिया कि अगले साल फिर उसे मदर डे पर उठाऊंगा और वही काम पूरा करके माँ के कर्ज को अदा कर दूंगा.
हमारी नई दुनिया में जीने वाले आधुनिक भारतीयों ये हमारी परंपरा नही है, क्योकि माँ हमारे सर्वश्व मे निवास करती है वह हमारे जीवन के हर क्षण मे हमारे साथ रहती है, पूरा जीवन हम उसकी सेवा करके भी उसके कर्ज को नही उतार पाते तो साल मे एक दिन याद करके हम क्या कर लेंगे अरे जो लोग अपनी माँ को अपने साथ नहीं रखते या भूल जाते हैं वे लोग मदर डे मनावें. हम तो भारतीय हैं हमारी तो दिन की शुरुआत ही माँ के चरणों से होती है इसीलिए हमारा हर दिन मदर डे होता है.
हमें पश्चिम से ये सीखने की नहीं बल्कि उनको ये सिखाने की जरुरत है कि हम अपने रिश्तों कि मार्केटिंग नहीं करते और न ही उनको साल मे केवल एक दिन मनाते हैं बल्कि हमारे हर रिश्ते हमारे जीवन कि अनमोल कडिया होते हैं जिनकी माला हम हर पल अपने ह्रदय से लगाये रहते हैं.

4 टिप्‍पणियां:

शोभा ने कहा…

सच्ची और अच्छी अभिव्यक्ति के लिए आभार।

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति

mishra gorakhpuriya ने कहा…

ji ratnsesh ji aap k baat se sahmat hu. maa to chau k tarah hai jo jivan bhar hame zindagi k thapedo se bachane ka prayash karti hai .usa k liye to agar hum pura jivan do to kaam hoga ye ek din ka payar........? mujhe bhi kuch yaad aa raha ki..... maa mujhe teri dua chahiye ,aanchal ki chav chahiye, har janam mai tu hi meri maa ho bhagvan se ye vada chahiye. shat-2 pranam maa....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति,
मातृ-दिवस की शुभ-कामनाएँ।