आपका हार्दिक अभिनन्‍दन है। राष्ट्रभक्ति का ज्वार न रुकता - आए जिस-जिस में हिम्मत हो

शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

आईये हम संकल्प लें !

वन्देमातरम !
मै आजाद हूँ..आजाद ही रहूँगा ...और आजाद ही मरूँगा .....इसलिए गुलामी का कोई प्रतीक मुझे स्वीकार नहीं .....मेरे अन्दर इंडिया नहीं भारत जीता है ...इसलिए मेरा नववर्ष जो आने वाले चैत्र के नवरात्र के प्रथम दिन वर्ष प्रतिपदा को है ही मनाऊंगा...आप सब का भी स्वागत है ..हम अंग्रेजों से 56 साल आगे चलते हैं ...फिर इस गुलामी के प्रतीक ...को क्यों अपनाएं !

2 टिप्‍पणियां:

दीर्घतमा ने कहा…

बहुत सुन्दर लिखा है अपने ये गुलाम मानसिकता के लोग है आइये हम संकल्पित हो भारतीय नववर्ष के लिए ,भौतिक विकाश भारत का विकाश नहीं --लाहौर,कराची और ढाका भी कभी भारतीय विकाश की कड़ी थे अज नहीं आइये हम भारतीय संस्कृति को भी इस विकाश की धरा में जोड़ने का प्रयत्न करे.

सुज्ञ ने कहा…

रत्नेश जी,

नव-वर्ष की शुभकामनाएँ