आपका हार्दिक अभिनन्‍दन है। राष्ट्रभक्ति का ज्वार न रुकता - आए जिस-जिस में हिम्मत हो

मंगलवार, 15 जनवरी 2013

प्यार भरे शब्दों से कभी तन्हाई मै भी लिखता था
झूम झूम के गोरी की अंगडाई मै भी लिखता था
पर जबसे मुड़के भारत माँ के सपनों को देखा है
जब से मैंने इसके आँचल में नागों को देखा है
अब याद नहीं रहती तन्हाई गोरी की अंगडाई भी
जबसे यौवन की पीढ़ी को राह भटकते देखा है
अब मै फिर वापस लौटूंगा माँ का कर्ज निभाने को
हे देश के यौवन तुम भी क्या आओगे साथ निभाने को ........रत्नेश

1 टिप्पणी:

दीर्घतमा ने कहा…

नमस्ते रत्नेश जी
बहुत दिन बाद आये स्वागत है आपका बहुत अच्छा लगा . बहुत सुन्दर कबिता
बहुत-बहुत धन्यवाद