आपका हार्दिक अभिनन्‍दन है। राष्ट्रभक्ति का ज्वार न रुकता - आए जिस-जिस में हिम्मत हो

मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

थू है उनपर !

माफ़ करें किन्तु यह शीर्षक उन लोगों के लिए है जो मानसिक दिवालेपन के कारण अपने एक बड़े ही संजीदा ब्लाग लेखक फिरदौस जी को अनाप सनाप लिखकर अपनी गन्दगी को फैला रहे हैं. वर्त्तमान में इस बेनामी लोगों कीबाढ़ सी आ गयी है जिनकी कोई पहचान नहीं है और गलत नामों से अपनी गन्दगी को हमारे ब्लॉगों पर उढ़ेल रहे है.

बेवकूफ किस्म के लोग जो अधजल गगरी की तरह छलक रहें है, जो ज्ञान से कोसों दूर अपनी गन्दी हो चुकी मानसिकता से समाज को दूषित कर रहे हैं, और गलत तरीके अपनाकर धमकाने की दृष्टि से टिप्पणी कर रहें है, मै उन्हें सावधान करना चाहता हूँ कि तर्क के आधार पर बात करें, और अगर यदि उनके पास सम्बंधित पोस्टों के विषय में ज्ञान का आभाव हो तो कृपया अपनी गंदगी से हमें गन्दा न करें!

मै सभी ब्लागर भाईयों से यह अपील करना चाहता हूँ कि विना पहचान वाले (जिनका लिंक ना मिलता हो और ब्लागर ना हों तथा जो ब्लाग के साथ छेड़छाड़ करते हों) उनका विरोध करें और हो सके तो उनकी टिप्पणियों को पोस्ट से निकल दें. क्योकि यह दीमक कि तरह हमें चाटने का असफल प्रयास कर रहें हैं तथा अपनी गन्दगी को हमारी पोस्टों के माध्यम से फैला रहे हैं.

फिरदौस (मेरी डायरी) जी जो एक ऐसी ब्लागर हैं कि उनकी हर पोस्ट तर्कसंगत और सत्यता पर आधारित होती है, उसका सामना करने कि बजाय कुछ खुदा किस्म (जो खुद को ही खुदा मन बैठे हैं) के लोग विना वजह परेशान कर रहे हैं. और बेनामी टिप्पणियों के माध्यम से धमकाने का भी प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं.

उनके लिए मै इतना अवश्य कहूँगा कि!
हल्का समझते हैं लोग मुझे शांत देखकर
शायद उन्हें अंदाजा नहीं है तूफान का !
रत्नेश त्रिपाठी

14 टिप्‍पणियां:

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

शुक्रिया रत्नेश जी,
कई 'असामाजिक तत्व' हमारे नाम से अपने ही ब्लॉग में कमेन्ट लिख रहे हैं... और उस पर क्लिक करने पर हमारा ब्लॉग खुलता है...

हम इन 'असामाजिक तत्वों' के ब्लॉग का बहिष्कार कर चुके हैं...हम न तो उनके ब्लॉग पर कोई कमेन्ट लिखते हैं और न ही अपने ब्लॉग पर इन 'असामाजिक तत्वों' के कमेन्ट प्रकाशित करते हैं...ये लोग किस क़द्र नीचता पर उतर आए हैं... इस वक़्त अल्लाह और उसका रसूल भी इन्हें देखे तो उनकी आंखें भी शर्म से झुक जाएं...

अल्लाह के बंदे इस क़द्र नहीं गिर सकते...ये लोग जिसे बहन कहते हैं, उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं... तो ये दूसरे मजहबों की मां-बहनों के साथ क्या करेंगे... कहने की ज़रूरत नहीं...

हमने अपने ब्लॉग पर जो लिखा है, उस पर क़ायम हैं...

aarya ने कहा…

फिरदौस जी हम आपके साथ हैं और हम ही क्यों वह सभी लोग जो सत्यता को पहचानते हैं.

चिट्ठाचर्चा ने कहा…

आपका ब्लॉग बहुत अच्छा है. आशा है हमारे चर्चा स्तम्भ से आपका हौसला बढेगा.

डा० अमर कुमार ने कहा…


सहमत हूँ, त्रिपाठी ।
सामूहिक रूप से उनके ब्लॉग को http://www.google.com/support/blogger/bin/request.py?page=main_tos पर आसामाजिक होने की रिपोर्टिंग की जाये, इससे परिणाम अवश्य निकलेगा ।

aarya ने कहा…

अमर जी
इस जानकारी के लिए धन्यवाद!

मोहन वशिष्‍ठ 9991428447 ने कहा…

koi bat nahi raaste niklenge bahut jaise amar ji ne sujhaya hai aap chinta mat karo

राज भाटिय़ा ने कहा…

फ़िरदौस ख़ान जी सब से पहले तो आप अपने ब्लांग का पास बर्ड बदले, लगता है किसी ने हेंक कर लिया है, दुसरा इन सब बक्वास के ब्लांग पर जाना ही बन्द कर दे.... इन्हे भाव ही मत दे, धमकी डरपोक लोग ही देते है,

बैरागी ने कहा…

झुण्ड में तो सूअर आते है
शेरनी अकेले ही आती है

mukti ने कहा…

मैं अदा जी के ब्लॉग पर जो टिप्पणी करके आयी हूँ, आपको धन्यवाद सहित वही दोहराना चाहूँगी---
"इन लोगों की नीचता बहुत दिनों से देख रही हूँ और फ़िरदौस के ब्लॉग पर लगातार टिप्पणी करके उनका उत्साहवर्धन भी कर रही हूँ. इन लोगों को एकाध बार पढ़ा फ़िरदौस के संदर्भ में ही तो मिचली सी आ गयी. मैं नहीं पचा पाती ऐसी बातों को और ये भी मानती हूँ कि इनको एवॉइड करना कोई हल नहीं है. पानी सिर के ऊपर चला गया है. इन लोगों का बहिष्कार होना चाहिये...इनके खिलाफ़ मुहिम चलनी चाहिये. पिछले कुछ महीनों से इन्होंने अच्छा-ख़ासा माहौल खराब कर रखा है.
फ़िरदौस के साथ तो सभी प्रगतिशील लोग और पूरा नारी समाज है ही, पर इन सांप्रदायिक लोगों के मामले में अधिकतर लोग तटस्थ हैं...हमें ये तटस्थता तोड़नी होगी और कुछ न कुछ करना होगा. क्या करें इस पर वरिष्ठ ब्लॉगर्स की मदद ली जा सकती है...
याद रखें...कुछ लोगों की सक्रियता हमेशा बहुसंख्यकों की चुप्पी और तटस्थता पर भारी पड़ी है...देश में होने वाले दंगे-फ़साद इसी कारण हुये हैं कि ज्यादातर लोग चुपचाप तमाशा देखते रहे हैं...अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ये ज़हर फैलाने की कोशिश बन्द होनी चाहिये."

Suresh Chiplunkar ने कहा…

फ़िरदौस जी, आप बेधड़क लिखती रहें… हम तो शुरु से आपके साथ रहे हैं… ये घटिया लोग आप पर हमला इसलिये कर रहे हैं क्योंकि आप महिला हैं। इससे पहले भी ये लोग एक अन्य महिला ब्लागर के साथ ऐसी हरकत कर चुके हैं और तब भी मुँह की खाई थी। यह हरकत महफ़ूज़ भाई के साथ नहीं होगी, क्योंकि उन लोगों को पता है कि फ़िर क्या होगा।

ब्लॉग जगत में आपका साथ देने वाले बहुतेरे लोग हैं, लेकिन यहाँ पर लोग धीरे-धीरे साथ आते हैं, शरमाते-सकुचाते-डरते, "लोग क्या कहेंगे", "मेरी छवि खराब न हो जाये" वाले अंदाज़ में… लेकिन अन्ततः साथ आ ही जाते हैं, क्योंकि "कीचड़" कोई भी पसन्द नहीं करता…। इसलिये आप जैसा लिख रही हैं वही तेवर बनाये रखें।

vedvyathit ने कहा…

इन तंग दिल लोगो कि अस्लियत उजागर होनी ही चाहिये
क्या इन के अगुआओकी आंखे फूट रही है जो वे इन्हे रोकते नही है
शायद ये उन्ही के इशारे पर यह कर रहे है
व्रएद व्यथित

arvind ने कहा…

हल्का समझते हैं लोग मुझे शांत देखकर
शायद उन्हें अंदाजा नहीं है तूफान का !
...सहमत हूँ

आपका ब्लॉग बहुत अच्छा है.

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

हम मज़हब की नहीं इंसानियत की बात करते हैं...
यह भारत की गौरवशाली परंपरा का ही हिस्सा है, जब किसी अल्पसंख्यक पर कोई मुसीबत आती है तो बहुसंख्यक वर्ग के लोग ही सबसे पहले मदद के लिए आते हैं...जबकि मज़हब का ढोल पीटने वाले आग लगाकर दूर से तमाशा देखते हैं...

एक लड़की (जिसे बहन कहते हैं) के ख़िलाफ़ इतनी घृणित साज़िश करके ये 'लोग' इस्लाम का सर ऊंचा कर रहे हैं या नीचा...???

चिट्ठाचर्चा ने कहा…

आईये... दो कदम हमारे साथ भी चलिए. आपको भी अच्छा लगेगा. तो चलिए न....