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रविवार, 6 जून 2010

क्या मुसलमान कभी हिन्दू की तरह सोचेंगे ?

अभी ब्लाग जगत में चल रही बड़े छोटे ब्लागरों की स्वाभिमान की लडाई पर सबका ध्यान आकृष्ट किया जा रहा है, जिसका कोई अर्थ समझ में नहीं आता है| लगता है हम भी झूठी टिप्पणिया बटोरने के चक्कर में व्यवसायिक पत्रकारों की तरह होते जा रहे हैं| जबकि लगातार हो रहे कुछ विशेष तत्वों के द्वारा हिन्दू धर्म पर बेवकूफी भरे (जिसको ये खुद नहीं समझते) प्रश्न जो अश्लीलता से भरे हैं, किये जा रहे हैं | इस पर ध्यान देना हम सबका फर्ज बनता है, ये ब्लाग के लिए नासूर ना बन जाये इसलिये ध्यान दें ! क्योंकि इनके खिलाफ भी काफी पोस्टे आनी शुरू हो गयी है, इस ब्लाग जगत को आखाडा ना बनाये | मैंने आजतक कभी हिन्दू मुसलमान को लेकर पोस्ट नहीं लिखा लेकिन बार बार हो रहे इन कृत्यों ने आज मजबूर कर दिया | आशा है सभी इसे एक सीख के रूप में ही लेंगे ...... क्यों कि मै यहाँ किसी को भी व्यक्तिगत रूप से लांछन नहीं लगा रहा और न हीं इसकी मुझे कोई जरुरत है !

अभी मैंने एक ब्लॉग पर तरुण विजय के लेख को पढ़ा, जिस तरुण विजय को इनके द्वारा जी भर कर गाली दी जाती है, आज वो इसलिए अच्छे हो गए क्योंकि उन्होंने इस्लाम और मुहम्मद साहब की अच्छाइयों का वर्णन किया है | कुछ समय से ब्लोग जगत में मुसलमान ब्लोगर हिन्दू धर्म को लेकर बहुत दुष्प्रचार कर रहे हैं। हिन्दू धर्म के पवित्र ग्रन्थों के बारे में उल-जलूल बातें कर रहे हैं. हिन्दू देवी-देवताओं के बारे में अपशब्द कह रहे हैं. परन्तु यह हिन्दुओं की महानता है कि वो मुसलमानों की धार्मिक चीज़ों का सम्मान करते हैं. हिन्दू दरगाह पर जाते हैं, पर मुसलमान मन्दिर नहीं जाते. अगर कोई मुसलमान मन्दिर जाने की बात कह दे या हिन्दू धर्म/संस्कृति की प्रशंसा कर दे तो मुसलमानों को शूल चुभ जाते हैं. उसे काफिर घोषित कर देते हैं. सलमान खान ने गणेश पूजा में भाग ले लिया तो मुल्लाओं ने उसे धर्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया. जब हिन्दू अभिनेता अजमेर दरगाह पर जाते हैं तो कोई भी हिन्दू धर्म गुरु उन्हें हिन्दू धर्म से नहीं निकालता.

क्या ये झंडाबरदार (जो खुद कितना इस्लाम को जानते है इसपर भी संदेह है) बता सकेंगे कि मस्जिद में जाने वाले हिन्दुओं कि संख्या में कितने प्रतिशत मुसलमान मंदिर में जाते हैं | केवल चिल्लाने से दूसरों को बहरा किया जा सकता है, सार्थक बदलाव लाने के लिए हर हाल में हिन्दू (उन्हें मै हिन्दू नहीं मानता जो मुसलमान को हिन्दू नहीं मानते) सोच ही विकसित करनी होगी, क्योंकि यही एकमात्र सर्वग्राही धर्म है | क्या कोई इससे कोई इंकार कर सकता है ! क्यों मुसलमान हिन्दुओं ने इतनी नफरत करते हैं? कि मुसलमान के मुंह से उन्हें हिन्दू धर्म की प्रशंसा सहन नहीं होती?
क्यों इस्लाम के नाम पर सदैव नफरत फैलाई जाती है? आज विश्व में जिन देशों में इस्लाम पर अधिक बल दिया जा रहा है, वही तबाही हो रही है.
ऐसा मै चाहता नहीं लेकिन आप जिस बात समझे वही लिखें, अपने मन कि गन्दगी को यहाँ ना उढेले अगर जानकारी की कमी है तो किसी विद्वान से जानकारी ले अन्यथा बदनाम करने के लिखना हो तो खुलेआम एलान करें हम भी तैयार है !

वैधानिक चेतावनी : यह पोस्ट किसी को बहकाने या भड़काने के लिए नहीं लिखी गयी है, जिसे समझ में आये वही टिप्पणी करे! इस ब्लाग पर गाली गौलझ कि अनुमति नहीं है !
रत्नेश त्रिपाठी

24 टिप्‍पणियां:

Mithilesh dubey ने कहा…

केवल चिल्लाने से दूसरों को बहरा किया जा सकता है,

बिल्कुल सही कहा आपने । काश कि वे मूर्ख लोग आप की बात समझ सके ।

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

मैं तो हमेशा ही इस बात को मान कर चलता हूँ कि इस दुनिया में कोई भी श्रेष्ठ चीज (व्यक्ति, धर्म कुछ भी ) यह नहीं कहती कि मैं श्रेष्ठ हूँ ! लोग खुद व खुद उसे उसके गुणों के आधार पर निर्धारित करते है कि कौन श्रेष्ठ है और कौन घटिया !

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

बेहद प्रासंगिक पोस्ट है...
दरअसल, यह सब उन किताबों की शिक्षा का असर है जो ख़ुद को 'श्रेष्ठ' और दूसरों को 'तुच्छ' समझने की मानसिकता पैदा करती हैं...
कबीर जी कहते हैं-
बुरा जो देखन मैं चला बुरा न मिलया कोय।
जो दिल देखा आपना मुझसे बुरा न कोय।।

हमें हिन्दुस्तानी तहज़ीब पर नाज़ है- क्योंकि
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है...

mrityunjay kumar rai ने कहा…

i agreed with you. but 95% Muslim population in India are poor and backward, they are not economically and socially capable to come out of their Shell. we as a true nationals should try to enhance the position of Muslim so that they can think over the matter other than bread and butter.

and las but not least,

NO RELIGION IS HIGHER THAN TRUTH

aarya ने कहा…

मृत्युंजय जी
मैने इस पोस्ट को पढ़े लिखे लोगों के कृत्यों को आधार बना कर लिखा है| और अशिक्षित केवल मुस्लिम ही नहीं है इस देश में हिन्दू भी हैं और इनसे कहीं ज्यादे हैं |

सुनील दत्त ने कहा…

Mr rai why only the muslims why should not we help those Hindus who are dying of hunger And about those Hindus who are commiting suicide due to economic problems.
persons lokeYou must understand that religion can never be the basis for poverty.By saying such things persons like you are commiting a crime on poor Hindus.

सुनील दत्त ने कहा…

आर्य जी विल्कुल सही प्रश्न उठाया है आपने कि क्यों मुसमानों का बहुमत अलगाववादी है क्यों वो उन हिन्दूओं के आस्था के केन्द्रों पर प्रहार करना अपना पहला कर्तब्य समझता है जिन हिन्दूओं ने हमेशा मुसलिम आतंकवादियों, आक्रमणकारियों द्वारा डाय गए वेहिसाब जुल्मोंसितम के बाबजूद कभी इस्लाम के विरूद्ध युद्ध की घोषणा नहीं की।
अब वक्त आ गया है कि मुसलिम अपनी इस अलगाववादी सोच को त्याग कर भारत की मेलजोल वाली संस्क़ति का सम्मान करें वरना अब वो वक्त दूर नहीं जब हिन्दू भी अपना धैर्य खोकर वही मार्ग अपनायेंगे जो मुसलमानों ने हिन्दूओं के प्रति कशमीरघाटी व देश के अन्य हिस्सों में अपना रखा है।

सुनील दत्त ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

बस यही चीज हिन्दू और मुसलमान के बीच का भ्रेद प्रकट करती है... यदि इतनी सहिष्णुता मुसलमानों में आ जाये तो यह बीमारी दूर ही न हो जाये...

अमृत पाल सिंह ने कहा…

कमी केवल मुसलमानों में नहीं.....हिन्दुओं में भी है...आप बोल तो रहे हैं कि इस्लाम नफरत फैला रहा है...लेकिन यहाँ आप भी तो वही कर रहे हैं....लोगों के मन में ज़हर भर रहे हैं....

सुनील दत्त ने कहा…

पाल जी कभी जरा एयने में झांक कर खुद के कर्मों को देखा है नहीं न एक वार देख लिजीए

महाशक्ति ने कहा…

मित्र सार्थक बात कही है आपने, आज के दौर सिर्फ मुस्लिम अधिकार की बात ही करते है किन्‍तु कर्तव्‍य को भूल जाते है।

aarya ने कहा…

@ अमृत जी !
मैंने लिख रखा है, जिन्हें ये लेख समझ में ना आये कृपया वो टिप्पणी ना करें| और आपने यही किया |

vedvyathit ने कहा…

bhn fidaus v aise hi do chr jno ko chhod kr aur kaun hain aisa shochne vale
vastv me ydi ve hidoon ki trh hojayenge to fir ve muslman kaise rhenge ydi koi swtntr sochega bhi to use jine kaun dega
us ka maulvi bhiskar to krvayenge hi sath hi kuchh aur bhi krva denge isi dr se aajad khyal ke log bhi chup rh jate hain ve dr ke mare apni juban nhi kholpate hain
yh bat hmare ek musman dost ne apne munh se kai hai
dr. ved vyathit

aarya ने कहा…

@ vedvyathit
आप सही कह रहे हैं, फिरदौस जी का आलोचक कोई है तो उन्ही को अपना बहन कहने वाले हैं (मै उन लोगों का नाम नहीं लूँगा, क्योंकि मै इस पोस्ट को विवादित नहीं बनना चाहता| ) इसीलिए मैंने कहा जी सर्वग्राही है वही धर्म है |

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सार्थक पोस्ट ...

सच का बोलबाला, झूठ का मुँह काला ने कहा…

ये लोग इस योग्य नही की इनसे बात की जा सके. इस्लाम अय्याशी और आतंक का पाठ पढाता है. सभी मुसलमान आतंकी नही, पर अधिकतर ब्लोगर कितने गद्दार हैं उनकी पोस्टो से पता चल जाता है. इस्लाम अय्याशों का धर्म है. घर में चार-चार औरतों के साथ अय्याशी. बहनों के साथ अय्याशी. पुत्रवधुओं के साथ अय्याशी. ये कितने ...... हैं, इसका उदाहरन असलम कासमी, अनवर जमाल, सलीम खान, एजाज़ अहमद, जीशान, अयाज अहमद, शाहनवाज (उसे अपने लोगो की गंदी करतूतें नहीं दिखती, हमेशा अपनी बहन के बुरके में घुसा रहता है) समय-समय पर अपनी पोस्टों और टिप्पणियों से देते रहते हैं. इनकी सामूहिक चेली अंजुम शेख भी इस्लाम की गंदी बातो पर बुरके में मुंह छिपा लेती है, इस्लाम की प्रशंसा का, अगर कोई मुस्लमान हिन्दू धर्म की प्रशंसा कर दे तो इनके पिछवाड़े सुलगने लगते हैं. वो कैरान्वी अलग-अलग नामों का बुरका पहन कर आता होगा. एक लेख लिखो की बुरका मुस्लिम (ना)मर्दों के लिए कितना जरुरी है

सच का बोलबाला, झूठ का मुँह काला ने कहा…

सार्थक पोस्ट

kshama ने कहा…

Itnaahi kahungi,ki,kisee bhi cheez ka atirek barbadi ki or le chalta hai...chahe koyi dharm ho!

इस्लाम की दुनिया ने कहा…

सार्थक पोस्ट

इस्लाम की दुनिया ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
इस्लाम की दुनिया ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
सुज्ञ ने कहा…

रत्नेश जी,

आपके स्वागत के लिये आभार,

आपकी पोस्ट विचारोत्तेजक है,

धन्यवाद

arvind ने कहा…

na hi kabhi musalaman hindu ki tarah sochega our na hi hindu musalman ki tarah.....han insaan---jarur insaan ki tarah sochega.....bahut acchi post.